उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun to ye anfus-o-afaq hain mazhar mere

यूँ तो ये अन्फ़ुस-ओ-आफ़ाक़ हैं मज़हर मेरे

یوں تو یہ انفس و آفاق ہیں مظہر میرے

शायर: Tabish Dehlvi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ तो ये अन्फ़ुस-ओ-आफ़ाक़ हैं मज़हर मेरे
एक दुनिया अभी आबाद है अन्दर मेरे

दायरा-वार नहीं एक ही मरकज़ को मुहीत
मैं वो परकार बदलते रहे महवर मेरे

कितने दुख हैं जो रहे तिश्ना-ए-इज़हार अब तक
कूज़ा-ए-हर्फ़ से सिमटे न समुंदर मेरे

अपने क़ामत का भी अंदाज़ा हो कुछ तो मुझ को
लेकिन आता ही नहीं कोई बराबर मेरे

जिन महाज़ों पे क़वी पाया न दुश्मन अपना
उन महाज़ों से पलट आए हैं लश्कर मेरे

हर क़दम पर मिरी पहचान बदल जाती है
जितने रिश्ते हैं मिरे उतने ही पैकर मेरे

आसमाँ-गीर है इस हब्स में मेरी परवाज़
इन फ़ज़ाओं में तवाना तो हैं शहपर मेरे

मुश्तरक जज़्बा-ए-इज़हार हो फिर क्यों न कहूँ
सब सुख़न मेरे हैं और सारे सुख़नवर मेरे

मेरे इंकार की तौहीन न कीजे 'ताबिश'
आप आँकें न ख़ज़फ़-रेज़ों से गौहर मेरे