उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun to hamare shahr mein qanun bhi nahin

यूँ तो हमारे शहर में क़ानून भी नहीं

یوں تو ہمارے شہر میں قانون بھی نہیں

शायर: Badnam Nazar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ तो हमारे शहर में क़ानून भी नहीं
क़ानून का सिरे से मगर ख़ून भी नहीं

मे'यार-ए-शे'र मेरा न तुम जाँच पाओगे
अक़दार अगर नहीं है तो शब-ख़ून भी नहीं

यूँ तो कोई शरीफ़ बुलाता नहीं मुझे
लेकिन मैं सारे शहर में मत’ऊन भी नहीं

मैं जिस का बोझ सर पे लिए फिर रहा हूँ आज
सुनता हूँ ये कि वो मिरा मम्नून भी नहीं

क्यों हँस रहे हैं आप मिरा घर है लापता
इस नक़्शे में तो आप का रंगून भी नहीं

जाने कहाँ गया है वो मेरा शरीक-ए-ग़म
ख़त भी नहीं है कोई कोई फ़ून भी नहीं

क्यों मुझ से ‘अस्करी की तरह मिलते हो 'नज़र'
मैं तो तुम्हारा भाई हुमायून भी नहीं