उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun bahaar aai hai is bar ki jaise qasid

यूँ बहार आई है इस बार कि जैसे क़ासिद

یوں بہار آئی ہے اس بار کہ جیسے قاصد (ردیف .. ے)

शायर: Faiz Ahmad Faiz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ बहार आई है इस बार कि जैसे क़ासिद
कूचा-ए-यार से बे-नैल-ए-मराम आता है

हर कोई शहर में फिरता है सलामत-दामन
रिंद मय-ख़ाने से शाइस्ता-ख़िराम आता है

हवस-ए-मुत्रिब-ओ-साक़ी में परेशाँ अक्सर
अब्र आता है कभी माह-ए-तमाम आता है

शौक़ वालों की हज़ीं महफ़िल-ए-शब में अब भी
आमद-ए-सुब्ह की सूरत तिरा नाम आता है

अब भी एलान-ए-सहर करता हुआ मस्त कोई
दाग़-ए-दिल कर के फ़रोज़ाँ सर-ए-शाम आता है