उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye tamanna thi ki hum itne suKHanwar hote

ये तमन्ना थी कि हम इतने सुख़नवर होते

یہ تمنا تھی کہ ہم اتنے سخنور ہوتے

शायर: Jafar Tahir9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये तमन्ना थी कि हम इतने सुख़नवर होते
इक ग़ज़ल कहते तो आबाद कई घर होते

दूरियाँ इतनी दिलों में तो न होतीं यारब
फैल जाते ये जज़ीरे तो समुंदर होते

अपने हाथों पे मुक़द्दर के नविश्ते भी पढ़
न सही मा'नी ज़रा लफ़्ज़ तो बेहतर होते

दिल पे इक वही और इल्हाम का रहता है समाँ
हम अगर रिंद न होते तो पयम्बर होते

हम अगर दिल न जलाते तो न जलते ये चराग़
हम न रोते जो लहू आइने में पत्थर होते

हम अगर जाम-ब-कफ़ रक़्स न करते रहते
तेरी राहों में सितारे न गुल-ए-तर होते

घर बना बैठे बयाबाँ में दिवाने वर्ना
पाँव उठ जाते तो जिबरील का शहपर होते

सूरतें यूँ तो न यारों की रुलाती रहतीं
ऐ ग़म-ए-मर्ग ये सदमे तो न दिल पर होते

हम रहे गरचे तही-दस्त ही जाफ़र-'ताहिर'
बस में ये बात भी कब थी कि अबूज़र होते