उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye shab-e-‘aish ye lamhat alag

ये शब-ए-‘ऐश ये लम्हात अलग

یہ شب عیش یہ لمحات الگ

शायर: Ijlal Majeed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये शब-ए-‘ऐश ये लम्हात अलग
और किसी मोड़ पे वो घात अलग

चीख़ने वाला हर इक लफ़्ज़ जुदा
कान में कहने की हर बात अलग

दिन हुआ करते थे कुछ और ही दिन
रात होती थी हर इक रात अलग

ये तो वो हैं जो अभी तक झेले
और जो होंगे वो सदमात अलग

अब भी गर हो सके तो बाँध के रख
रेशमी दूब से जज़्बात अलग