उर्दू शायरी · ग़ज़ल

miTTi tha kis ne chaak pe rakh kar ghuma diya

मिट्टी था किस ने चाक पे रख कर घुमा दिया

مٹی تھا کس نے چاک پہ رکھ کر گھما دیا

शायर: Ijlal Majeed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिट्टी था किस ने चाक पे रख कर घुमा दिया
वो कौन हाथ थे कि जो चाहा बना दिया

जो अब तलक छुपाए थी कमरे की रौशनी
रस्तों की तीरगी ने वो सब कुछ दिखा दिया

परियों के देस वाली कहानी भी ख़ूब है
बच्चों को जिस ने फिर यूँही भूका सुला दिया

अब और क्या तलाश है क्यूँ दीदा-रेज़ हो
मिट्टी में बस वही था जो तुम ने उगा दिया

कुछ अज़दहे से रेत पे कुछ बंद सीपियाँ
साहिल को लूटती हुई लहरों ने क्या दिया