उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ajab mazaq ajab dil-lagi ka samna hai

'अजब मज़ाक़ 'अजब दिल-लगी का सामना है

عجب مذاق عجب دل لگی کا سامنا ہے

शायर: Ijlal Majeed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'अजब मज़ाक़ 'अजब दिल-लगी का सामना है
हमारे घर में हमें बे-घरी का सामना है

कि मौत होती तो इक खेल हम समझ लेते
मगर यहाँ तो हमें ज़िंदगी का सामना है

न कल की याद न कल की उमीद बाक़ी है
अभी अभी कि अभी बस अभी का सामना है

कोई तमाशा कोई खेल दिल को भाता नहीं
कसीला ज़ाइक़ा और बे-दिली का सामना है

'अजीब शोर-ओ-तलातुम है रूह में जब से
किसी की सब्ज़ ख़ुनक ख़ामुशी का सामना है