उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye mere shahr ka ek aur hadisa hoga

ये मेरे शहर का इक और हादिसा होगा

یہ میرے شہر کا اک اور حادثہ ہوگا

शायर: Aabid Adeeb8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये मेरे शहर का इक और हादिसा होगा
वो कल यहाँ मिरा मेहमान बन चुका होगा

तलाश में हूँ किसी की मैं कब से सरगर्दां
उसी तरह कोई मुझ को भी ढूँढता होगा

मिरी तरह से कोई चीख़ता है राहों में
मिरी तरह कोई दुनिया को देखता होगा

लगा के आएगा चेहरा कोई नया शब में
वो जिस को बैठ के दिन में तराशता होगा

शनासा चेहरे भी लगने लगे हैं बेगाने
अब अपना वक़्त ही शायद बदल रहा होगा

उदास उदास सा खोया हुआ सा रहता है
कुछ उस से भी कोई कह कर बदल गया होगा

थका थका सा उसी दर पे आ के बैठा था
न पूछा होगा किसी ने तो चल दिया होगा

जहाँ पहुँच के क़दम डगमगाए हैं सब के
उसी मक़ाम से अब अपना रास्ता होगा