उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab jab bhi dekhiye use KHun-bar si lage

जब जब भी देखिए उसे ख़ूँ-बार सी लगे

جب جب بھی دیکھیے اسے خوں بار سی لگے

शायर: Aabid Adeeb7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब जब भी देखिए उसे ख़ूँ-बार सी लगे
दुनिया हमेशा बरसर-ए-पैकार सी लगे

हर हर नफ़स पे रंग बदलती है ज़िंदगी
इक फूल सी लगे है कभी ख़ार सी लगे

चेहरा है मेरे दोस्त का या कोई आइना
देखूँ उलट-पलट के तो भी आरसी लगे

आदत सी पड़ गई है उसे बोलने की तेज़
वो बात भी करे है तो तकरार सी लगे

तुम साथ हो तो हम भी बयाबाँ को घर करें
ये सख़्त धूप साया-ए-दीवार सी लगे

हर हर क़दम पे जैसे कि बिकता हो आदमी
बस्ती तमाम मिस्र के बाज़ार सी लगे

'आबिद' तमाम शहर पे आलम है कौन सा
हर एक शक्ल नक़्श-ब-दीवार सी लगे