उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye kisi ne tum se ghalat kaha mujhe karwan ki talash hai

ये किसी ने तुम से ग़लत कहा मुझे कारवाँ की तलाश है

یہ کسی نے تم سے غلط کہا مجھے کارواں کی تلاش ہے

शायर: J. P. Saeed7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये किसी ने तुम से ग़लत कहा मुझे कारवाँ की तलाश है
जहाँ मैं हूँ तुम हो कोई न हो मुझे इस जहाँ की तलाश है

लिए ज़ौक़-ए-सज्दा में दर-ब-दर फिरा मैं ने पाया नहीं मगर
जहाँ अपने आप झुके जबीं इसी आस्ताँ की तलाश है

न है वस्ल की कोई आरज़ू न तो हिज्र की कोई गुफ़्तुगू
जो शिकार हो ग़म-ए-'इश्क़ का उसी राज़-दाँ की तलाश है

उसे दो ख़बर कि वो आशियाँ जो है सोज़ क़ल्ब से ज़ौ-फ़िशाँ
ये सुना है मैं ने कि बर्क़ को मिरे आशियाँ की तलाश है

मिरे शौक़-ए-दीद की आरज़ू नहीं चंद फूलों की जुस्तुजू
मिरे रंग-ओ-बू के मज़ाक़ को किसी गुलसिताँ की तलाश है

मिरे दिल में ग़म का जो ख़ार है मिरा दिल उसी पे निसार है
जिसे मेरे दर्द का दर्द हो उसी मेहरबाँ की तलाश है

किसी दिल में कोई मकीन है किसी दर पे कोई जबीन है
जहाँ हो न कोई मिरे सिवा मुझे उस मकाँ की तलाश है