उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye kis ne bagh se us shaKHs ko bula liya hai

ये किस ने बाग़ से उस शख़्स को बुला लिया है

یہ کس نے باغ سے اس شخص کو بلا لیا ہے

शायर: Tahzeeb Hafi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये किस ने बाग़ से उस शख़्स को बुला लिया है
परिंद उड़ गए पेड़ों ने मुँह बना लिया है

उसे पता था मैं छूने में वक़्त लेता हूँ
सो उस ने वस्ल का दौरानिया बढ़ा लिया है

ये रात नाम नहीं ले रही थी कटने का
चराग़ जोड़ के लोगों ने दिन बना लिया है

दरख़्त छाओं से हट कर भी और बहुत कुछ है
ये कैसी चीज़ थी और हम ने काम क्या लिया है

खुरच रहा हूँ मैं दीवार पर लिखे हुए नाम
'अजीब तरह की इक बेबसी ने आ लिया है