उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bhula diya tha jis ko ek sham yaad aa gaya

भुला दिया था जिस को एक शाम याद आ गया

بھلا دیا تھا جس کو ایک شام یاد آ گیا

शायर: Tahzeeb Hafi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

भुला दिया था जिस को एक शाम याद आ गया
ग़ज़ाल देख कर वो ख़ुश-ख़िराम याद आ गया

ख़ुदा का शुक्र है कि साँस टूटने से पेशतर
वो शक्ल याद आ गई वो नाम याद आ गया

वो जिस की ज़ुल्फ़ आँचलों की छाओं को तरस गई
शब-ए-विसाल उस को एहतिराम याद आ गया

मैं पिछले दस बरस से तेरे दिल में घर न कर सका
तिरी मुज़ाहिमत से वियतनाम याद आ गया

मैं आज ईस्टवुड की एक फ़िल्म देख कर हटा
तो मुझ को इक पुराना इंतिक़ाम याद आ गया