उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye kis KHalish ne phir is dil mein aashiyana kiya

ये किस ख़लिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया

یہ کس خلش نے پھر اس دل میں آشیانہ کیا

शायर: Faiz Ahmad Faiz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये किस ख़लिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया
फिर आज किस ने सुख़न हम से ग़ाएबाना किया

ग़म-ए-जहाँ हो रुख़-ए-यार हो कि दस्त-ए-अदू
सुलूक जिस से किया हम ने आशिक़ाना किया

थे ख़ाक-ए-राह भी हम लोग क़हर-ए-तूफ़ाँ भी
सहा तो क्या न सहा और किया तो क्या न किया

ख़ुशा कि आज हर इक मुद्दई के लब पर है
वो राज़ जिस ने हमें राँदा-ए-ज़माना किया

वो हीला-गर जो वफ़ा-जू भी है जफ़ा-ख़ू भी
किया भी 'फ़ैज़' तो किस बुत से दोस्ताना किया