उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye harf harf ke ruKH par KHulus ka ghaza

ये हर्फ़ हर्फ़ के रुख़ पर ख़ुलूस का ग़ाज़ा

یہ حرف حرف کے رخ پر خلوص کا غازہ

शायर: Urooj Zaidi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये हर्फ़ हर्फ़ के रुख़ पर ख़ुलूस का ग़ाज़ा
बिखर न जाए कहीं मेरे दिल का शीराज़ा

क़दम-क़दम पे जो मिलता है इक ग़म-ए-ताज़ा
हमारी दीदा-वरी का है ये भी ख़म्याज़ा

ख़ुश-आमदीद लिखा है तिरी जबीं पे मगर
मिरे लिए है अभी बंद दिल का दरवाज़ा

कभी ये वक़्फ़-ए-करम है कभी तग़ाफ़ुल-दोस्त
तिरी नज़र से हुआ तेरे दिल का अंदाज़ा

ये जब्र-ए-शौक़ समझते हैं हम उसे मा'सूम
फ़लक-मक़ाम है जिस के सितम का आवाज़ा

जो ग़म निहाँ है मिरे पर्दा-ए-तबस्सुम में
तुम्हारा काम नहीं ऐसे ग़म का अंदाज़ा

'उरूज' मेरी तरफ़ से है नज़्र-ए-अहल-ए-नज़र
वो इक ग़ज़ल कि मज़ामीन जिस के हैं ताज़ा