उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye dil fareb-e-tamanna mein be-qarar kiya

ये दिल फ़रेब-ए-तमन्ना में बे-क़रार किया

یہ دل فریب تمنا میں بے قرار کیا

शायर: Saba Alam Shah8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये दिल फ़रेब-ए-तमन्ना में बे-क़रार किया
यही है जुर्म जिसे हम ने बार-बार किया

न हम ने सूद-ओ-ज़ियाँ देख कर मोहब्बत की
न नफ़रतों का कभी हम ने कारोबार किया

शिकस्ता-रूह सुलगती निगह दिल-ए-महजूर
न पूछ कैसे हर इक ज़ख़्म का शुमार किया

तिरे जमाल-ए-नज़र ने दिया फ़रेब हमें
उसी फ़रेब-ए-नज़र ने है अश्क-बार किया

नवा-ए-सुब्ह-ए-अज़ल तेरी चाह में हम ने
न पूछ दश्त-ए-ख़मोशाँ को कैसे पार किया

नज़र न आई हक़ीक़त मजाज़ की सूरत
निगाह-ए-शौक़ ने पैहम ये इंतिज़ार किया

गिरी थी बर्क़-ए-तजल्ली जो क़ल्ब पर मेरे
उसी ने राज़-ए-हक़ीक़त को आश्कार किया

सहर की आस में गुज़री 'सबा' ये उम्र तमाम
हरीम-ए-ज़ीस्त का ज़ुल्मत ने यूँ हिसार किया