उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab se jaana hai ki duniya mein wafa koi nahin

जब से जाना है कि दुनिया में वफ़ा कोई नहीं

جب سے جانا ہے کہ دنیا میں وفا کوئی نہیں

शायर: Saba Alam Shah12 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब से जाना है कि दुनिया में वफ़ा कोई नहीं
फिर किसी से भी रहा हम को गिला कोई नहीं

हर तरफ़ झूट है धोका है बे-ईमानी है
और इख़्लास-ओ-मोहब्बत का सिला कोई नहीं

हर ज़बाँ पर गिले शिकवे तो बहुत हैं लेकिन
हर्फ़-ए-तहसीन नहीं लफ़्ज़-ए-दुआ कोई नहीं

अजनबी हो गए वो लोग जो अपने थे कभी
हम से अज़-राह-ए-मुरव्वत भी मिला कोई नहीं

मेरी ख़ुशियों में मिरे साथ ज़माना था मगर
मुश्किलें आईं तो फिर साथ चला कोई नहीं

हक़-परस्ती के बहुत दा'वे किए सब ने मगर
रास्ता छोड़ के बातिल का गया कोई नहीं

सुनते हैं पहले ज़माने में बुरे लोग थे कम
अब तो लगता है कि दुनिया में भला कोई नहीं

ज़िंदगी बीत गई सारी मगर अपने लिए
हम को लम्हा कभी फ़ुर्सत का मिला कोई नहीं

इश्क़ के दश्त से गुज़रे तो ये मालूम हुआ
राह पुर-ख़ार नहीं है तो मज़ा कोई नहीं

वो जो कहते थे मिरे बिन नहीं जी पाएँगे
सारे ज़िंदा हैं अभी तक तो मरा कोई नहीं

मुज़्तरिब दिल है अगर तेरा तो सोचा है कभी
कैसे पाएगा सुकूँ इस में ख़ुदा कोई नहीं

जब मोहब्बत नहीं दुनिया से तो शिकवा कैसा
तेरे दिल में तो लगन उस की 'सबा' कोई नहीं