उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye dil bhi dub gaya siDhiyan utarte hue

ये दिल भी डूब गया सीढ़ियाँ उतरते हुए

یہ دل بھی ڈوب گیا سیڑھیاں اترتے ہوئے

शायर: Tahir Baloch5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये दिल भी डूब गया सीढ़ियाँ उतरते हुए
सुनी न कोई सदा सीढ़ियाँ उतरते हुए

ख़ुशी ख़ुशी मैं तुझे छोड़ कर तो आया मगर
बहुत उदास हुआ सीढ़ियाँ उतरते हुए

कहीं ये तेरी सिखाई हुई तो आई नहीं
उलझ रही है हवा सीढ़ियाँ उतरते हुए

उसे भी तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ का हो कोई एहसास
वो लौट आए ख़ुदा सीढ़ियाँ उतरते हुए

वो अब गली में कहीं ग़म-ज़दा खड़ा हुआ है
जो हँस रहा था बड़ा सीढ़ियाँ उतरते हुए