उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aansuon siskiyon mein aahon mein

आँसुओं सिसकियों में आहों में

آنسوؤں سسکیوں میں آہوں میں

शायर: Tahir Baloch7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँसुओं सिसकियों में आहों में
ख़्वाब दफ़ना दिए निगाहों में

उन को क्या दुश्मनों का डर होगा
आप हों जिन के ख़ैर-ख़्वाहों में

हम तही-दस्त हार कर तुझ को
अब ग़ुलामों में हैं न शाहों में

थक गए ज़ीस्त की अज़िय्यत से
आ गए 'इश्क़ की पनाहों में

आज-कल कुछ ज़वाल है वर्ना
यूँ इज़ाफ़ा न कर गुनाहों में

चंद लम्हे सुकून दे मुझ को
कितनी लज़्ज़त है तेरी बाहों में

तेरे आने की जब मिलेगी ख़बर
हम तो मारे गए हैं चाहों में