उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye dard aankh se zahir hai dil udas nahin

ये दर्द आँख से ज़ाहिर है दिल उदास नहीं

یہ درد آنکھ سے ظاہر ہے دل اداس نہیں

शायर: Iftikhar Hussain Ifti5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये दर्द आँख से ज़ाहिर है दिल उदास नहीं
कि अब ये दर्द की शिद्दत भी दिल को रास नहीं

हवा-ए-दश्त मिरे ज़ख़्म-ए-दिल पे मरहम रख
मिरा 'इलाज मिरे चारागर के पास नहीं

ये मेरा दिल नहीं ख़ामोशियों का सागर है
यहाँ किसी के पलटने की दिल को आस नहीं

मिरे रक़ीब जिन्हें तू ने मंज़िलत दी है
किसी लिहाज़ से वो मेरे आस-पास नहीं

मैं किस के नाम करूँ शा'इरी मिरी 'इफ़ती'
यहाँ पे सारे सनम हैं सुख़न-शनास नहीं