उर्दू शायरी · ग़ज़ल

udasiyon ka ye mausam guzar hi jaega

उदासियों का ये मौसम गुज़र ही जाएगा

اداسیوں کا یہ موسم گزر ہی جائے گا

शायर: Iftikhar Hussain Ifti5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उदासियों का ये मौसम गुज़र ही जाएगा
निशाँ रहेगा मगर घाव भर ही जाएगा

तुम्हारे शहर के इंसाफ़ का तक़ाज़ा है
गुनाह सब का यहाँ मेरे सर ही जाएगा

जिसे तुम्हें ही फ़क़त चाहने की 'आदत हो
ख़याल-ए-हिज्र से आख़िर वो डर ही जाएगा

इसी उमीद से झेले हैं हुस्न वाले मुझे
ये बद-नुमा भी किसी रोज़ मर ही जाएगा

बहुत हुआ ये भटकते हुए सदा रहना
ये ज़िंदगी का नशा है उतर ही जाएगा