उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye daDhiyan ye tilak dhaariyan nahin chaltin

ये दाढ़ियाँ ये तिलक धारियाँ नहीं चलतीं

یہ داڑھیاں یہ تلک دھاریاں نہیں چلتیں

शायर: Kaif Bhopali5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये दाढ़ियाँ ये तिलक धारियाँ नहीं चलतीं
हमारे अहद में मक्कारियाँ नहीं चलतीं

क़बीले वालों के दिल जोड़िए मिरे सरदार
सरों को काट के सरदारियाँ नहीं चलतीं

बुरा न मान अगर यार कुछ बुरा कह दे
दिलों के खेल में ख़ुद्दारियाँ नहीं चलतीं

छलक छलक पड़ीं आँखों की गागरें अक्सर
सँभल सँभल के ये पनहारियाँ नहीं चलतीं

जनाब-ए-'कैफ़' ये दिल्ली है 'मीर' ओ 'ग़ालिब' की
यहाँ किसी की तरफ़-दारियाँ नहीं चलतीं