उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye bhi nahin ki humne bharosa kiya na ho

ये भी नहीं कि हम ने भरोसा किया न हो

یہ بھی نہیں کہ ہم نے بھروسا کیا نہ ہو

शायर: Tabassum Azmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये भी नहीं कि हम ने भरोसा किया न हो
ये भी नहीं कि आँख से पर्दा हटा न हो

ये भी नहीं कि आप समझ पाएँ दिल की बात
ये भी नहीं कि आप को कुछ भी पता न हो

ये भी नहीं कि सब पे ज़माना हो मेहरबाँ
ये भी नहीं किसी से ज़माना ख़फ़ा न हो

ये भी नहीं कि आँख है दर पर लगी हुई
ये भी नहीं कि दिल को कोई आसरा न हो

ये भी नहीं कि ज़ब्त से गुज़रे नहीं कभी
ये भी नहीं कि आँख से आँसू बहा न हो

ये भी नहीं कि यास के बादल जमे रहे
ये भी नहीं कि आस का सूरज उगा न हो

ये भी नहीं कि वा'दे निबाहे गए हों सब
ये भी नहीं कि कोई भी वा'दा वफ़ा न हो