उर्दू शायरी · ग़ज़ल

in mein poshida hain hikmat ke KHazane kya kya

इन में पोशीदा हैं हिकमत के ख़ज़ाने क्या क्या

ان میں پوشیدہ ہیں حکمت کے خزانے کیا کیا

शायर: Tabassum Azmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इन में पोशीदा हैं हिकमत के ख़ज़ाने क्या क्या
कह गए बात पते की हैं सियाने क्या क्या

मुँह के बल आ गिरे वो जिन का हवा पर था दिमाग़
वक़्त ने ताक के साधे हैं निशाने क्या क्या

घर पहुँचने में ज़रा देर हुई बच्चों को
हम ने भी सोच लिया इतने में जाने क्या क्या

कभी अफ़्साने को पहनाते हैं सच का जामा
कभी सच्चाई के बनते हैं फ़साने क्या क्या

न मिले ऐब तो तुरपाई उधेड़ो सारी
नुक्ता-चीनी को 'तबस्सुम' हैं बहाने क्या क्या