उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye baat kaun kahega bhala amiron ko

ये बात कौन कहेगा भला अमीरों को

یہ بات کون کہے گا بھلا امیروں کو

शायर: Garima saxena4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये बात कौन कहेगा भला अमीरों को
सुकून पाना है तो ढूँढ लो फ़क़ीरों को

बस इतनी बात से क़िस्मत भी रूठी बैठी है
वो मान बैठा है सब कुछ फ़क़त लकीरों को

हमारा हाल रहा है हमेशा वैसा ही
हमारा लाभ मिला है फ़क़त वज़ीरों को

हमारे रहते तुम्हें धूप तो नहीं लगती
ये पेड़ पूछते रहते हैं राहगीरों को