उर्दू शायरी · ग़ज़ल

os ke sare danon ko chug jati hai

ओस के सारे दानों को चुग जाती है

اوس کے سارے دانوں کو چگ جاتی ہے

शायर: Garima saxena7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ओस के सारे दानों को चुग जाती है
धूप तो भूकी चिड़िया बन कर आती है

जितना गहराता जाता है अँधियारा
रात गगन में उतने दीप जलाती है

आठ बजे तक सोई रहती थी जो कल
माँ बनते ही आहट से उठ जाती है

पिंजरे को वो तोड़ नहीं पाती है पर
चिड़िया आज़ादी के नग़्मे गाती है

ऊँचे ऊँचे ख़्वाब दिखाती है मुझ को
मेरी गुड़िया जो कि कमर तक आती है

मेरी माँ देती थी दाना चिड़ियों को
मेरी बेटी आज तलक दोहराती है

जिस माचिस से आग लगाने आए हो
वो माचिस चूल्हे को भी सुलगाती है