उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye baat ab ke use batana nahin paDegi

ये बात अब के उसे बताना नहीं पड़ेगी

یہ بات اب کے اسے بتانا نہیں پڑے گی

शायर: Zaeem Rasheed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये बात अब के उसे बताना नहीं पड़ेगी
ग़ज़ल को हरगिज़ ग़ज़ल सुनाना नहीं पड़ेगी

जो वो मिला तो मैं ख़र्च कर दूँगा एक पल में
बदन की ख़ुश्बू मुझे बचाना नहीं पड़ेगी

तुझे बियाहूँ तो दो क़बीले क़रीब होंगे
किसी को बंदूक़ भी उठाना नहीं पड़ेगी

मैं अपने लहजे का हाथ थामे निकल पड़ा हूँ
किसी को आवाज़ भी लगाना नहीं पड़ेगी

मैं अपनी हर इक सियाह-बख़्ती को जानता हूँ
'ज़ईम' तोते को फ़ाल उठाना नहीं पड़ेगी