उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yahi wafa ka sila hai to koi baat nahin

यही वफ़ा का सिला है तो कोई बात नहीं

یہی وفا کا صلہ ہے تو کوئی بات نہیں

शायर: Raaz Allahabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यही वफ़ा का सिला है तो कोई बात नहीं
ये दर्द तुम ने दिया है तो कोई बात नहीं

यही बहुत है कि तुम देखते हो साहिल से
सफ़ीना डूब रहा है तो कोई बात नहीं

ये फ़िक्र है कहीं तुम भी न साथ छोड़ चलो
जहाँ ने छोड़ दिया है तो कोई बात नहीं

तुम्ही ने आइना-ए-दिल मिरा बनाया था
तुम्ही ने तोड़ दिया है तो कोई बात नहीं

किसे मजाल कहे कोई मुझ को दीवाना
अगर ये तुम ने कहा है तो कोई बात नहीं