उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yan talak ke hai tere hijr mein fariyaad ki bas

याँ तलक के है तिरे हिज्र में फ़रियाद कि बस

یاں تلک کے ہے ترے ہجر میں فریاد کہ بس

शायर: Taban Abdul Hai5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

याँ तलक के है तिरे हिज्र में फ़रियाद कि बस
न हुआ तू भी कभी हाए ये इरशाद कि बस

एक बुलबुल भी चमन में न रही अब की फ़सल
ज़ुल्म ऐसा ही किया तू ने ऐ सय्याद कि बस

बे-सुतूँ खोद के सर फोड़ दिया जी अपना
काम ऐसा ही हुआ तुझ से ऐ फ़रहाद कि बस

दिल की हसरत न रही दिल में मिरे कुछ बाक़ी
एक ही तेग़ लगा ऐसी ऐ जल्लाद कि बस

इश्क़ में उस के बगूले कि तिरा ऐ 'ताबाँ'
ख़ाक अपनी को दिया याँ तईं बर्बाद कि बस