उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaadon ki rakh mein har lamha dhuan dhuan hai

यादों की राख में हर लम्हा धुआँ धुआँ है

یادوں کی راکھ میں ہر لمحہ دھواں دھواں ہے

शायर: Vandana Bhardwaj Tiwary Vani7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यादों की राख में हर लम्हा धुआँ धुआँ है
होंटों पे बिखरा हर इक नग़्मा धुआँ धुआँ है

माज़ी की आग में जल के उम्र गुज़री सारी
अब बुझ गई हूँ तो ये चेहरा धुआँ धुआँ है

इंसानियत की लौ बुझती है गली गली में
और शहर भर में हर इक रस्ता धुआँ धुआँ है

तन्हाई की हवा से इक शम्अ' हारी कल शब
कमरे का मेरे कोना कोना धुआँ धुआँ है

तू रूठ कर न मेरे दिल को जला मिरे यार
लग जा गले कि दिल का शो'ला धुआँ धुआँ है

दुनिया की धूप में जाने कब से ही झुलस कर
मेरे वजूद का हर ज़र्रा धुआँ धुआँ है

इक ठहरी ठहरी सी ख़्वाहिश की तपिश से 'वानी'
नम आँखों का ये गीला सहरा धुआँ धुआँ है