उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHwahishen aain andheron ki si fitrat oDhe

ख़्वाहिशें आईं अँधेरों की सी फ़ितरत ओढ़े

خواہشیں آئیں اندھیروں کی سی فطرت اوڑھے

शायर: Vandana Bhardwaj Tiwary Vani6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़्वाहिशें आईं अँधेरों की सी फ़ितरत ओढ़े
फिर ग़म आया चढ़ती रातों की सी ख़सलत ओढ़े

यार माना था उसे हम ने मोहब्बत की थी
वो मगर आया रक़ीबों की सी ज़ुल्मत ओढ़े

बाग़ ये अहल-ए-चमन ने ही उजाड़ा आख़िर
अब मनाज़िर है बयाबाँ की सी वहशत ओढ़े

पर निकलते ही परिंदा घोंसले को भूला
उड़ गया दूर वो मंज़िल की सी चाहत ओढ़े

याद में रह भी गई है तो वो तन्हा रातें
उम्र गुज़री है ये मरघट की सी ख़ल्वत ओढ़े

तेरे दर पे एक अर्से से अरे ओ कान्हा
रूह बरपा है ये मीरा की सी हसरत ओढ़े