उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo nahin uski magar jadugari maujud hai

वो नहीं उस की मगर जादूगरी मौजूद है

وہ نہیں اس کی مگر جادوگری موجود ہے

शायर: Zafar Iqbal Zafar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो नहीं उस की मगर जादूगरी मौजूद है
इक सहर-आलूद मुझ में बे-ख़ुदी मौजूद है

सफ़-ब-सफ़ दुश्मन ही दुश्मन हैं मिरे चारों तरफ़
हौसला देखो कि फिर भी ज़िंदगी मौजूद है

बुझ गई है बस्तियों की आग इक मुद्दत हुई
ज़ेहन में लेकिन अभी तक शो'लगी मौजूद है

बाद-ए-सरसर चल रही है और उस के बावजूद
फिर भी शम्ओं' में अभी तक रौशनी मौजूद है

है अजब ए'जाज़ ये उस की मोहब्बत का 'ज़फ़र'
जागती आँखों में ख़्वाब-ए-ज़िंदगी मौजूद है