उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo KHwab mein aane ka ehsas dilate hain

वो ख़्वाब में आने का एहसास दिलाते हैं

وہ خواب میں آنے کا احساس دلاتے ہیں

शायर: Osaama ameer10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो ख़्वाब में आने का एहसास दिलाते हैं
इस ख़ल्वत-ए-मुश्किल में मुश्किल को बढ़ाते हैं

दोनों के रवय्यों में हद-दर्जा तफ़ावुत है
आप आग दिखाते हैं हम शे'र सुनाते हैं

किस दिल के भरोसे हम उस घर में क़दम रक्खें
वो लोग जो पहले ही दुनिया नज़र आते हैं

उन होंटों की बाबत हम क्या कुछ नहीं कह सकते
पर जी को वही ख़ुश है जो मीर कहाते हैं

है जज़्बा-ए-बे-बाकी उस ख़ातिर-ए-नाज़ुक में
शहवत सी छलकती है जब होंट चबाते हैं

इक ख़ौफ़ सा पैहम है आँखों में ज़माने से
आज़ादी की बातों में ज़ंजीर दिखाते हैं

कुछ शुग़्ल नहीं गोया ये चाक-गरेबानी
बेहाल जो होते हैं तब बार उठाते हैं

दिन भर की उदासी का कुछ 'इल्म नहीं जिन को
हम रात में उन सब की तस्वीर बनाते हैं

आवाज़ लगाने से कुछ गर्द सी छटती है
जब ज़िंदगी दूभर हो आवाज़ लगाते हैं

इन रोने रुलाने की बातों में नहीं आते
वो हिज्र के मारे हैं और हँसते हँसाते हैं