उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek hi waqt mein ek jaisi tan-asani mein

एक ही वक़्त में इक जैसी तन-आसानी में

ایک ہی وقت میں اک جیسی تن آسانی میں

शायर: Osaama ameer7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक ही वक़्त में इक जैसी तन-आसानी में
हम बग़ल-गीर हुए भी तो परेशानी में

काकुल-अफ़्शानी तहय्युर का सबब है तेरी
बाग़ का बाग़ भी है नश्शा-ए-हैरानी में

इक अलग वज़' में रहने का सलीक़ा है हमें
लोग तो जाँ से चले जाते हैं वीरानी में

उस की तस्वीर उठा लेता हूँ जाते जाते
कुछ तो सामान हो इस बे-सर-ओ-सामानी में

कैफ़ मत पूछिए यूँ हम से ज़बूँ-हाली का
मौज ही मौज है इस चाक-गरेबानी में

इर्तिक़ा है कि ब-तदरीज पिए जाता हूँ
सिर्फ़ नश्शा ही नहीं होता फ़रावानी में

और ही हुस्न-ए-निहायत को पहुँच जाता हूँ
तुम ने देखा ही नहीं मुझ को परेशानी में