उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apne tasawwuraat se aage nikal gaya

अपने तसव्वुरात से आगे निकल गया

اپنے تصورات سے آگے نکل گیا

शायर: Osaama ameer5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपने तसव्वुरात से आगे निकल गया
कल शब में काएनात से आगे निकल गया

सूरज को देखने के लिए मैं दम-ए-सहर
बे-इख़्तियार रात से आगे निकल गया

वो पत्थरों को करने लगा आईना-सिफ़त
मैं हद-ए-मुम्किनात से आगे निकल गया

मंज़र बहुत खुले मिरी आँखों के सामने
लेकिन मैं वाक़िआ'त से आगे निकल गया

मैं हाँ और इक नहीं के अभी दरमियान हूँ
मेरा वजूद ज़ात से आगे निकल गया