उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo ek gali rahi din bhar nigah mein meri

वो इक गली रही दिन भर निगाह में मेरी

وہ اک گلی رہی دن بھر نگاہ میں میری

शायर: Osaama ameer7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो इक गली रही दिन भर निगाह में मेरी
और इक हिकायत-ए-गुल इंतिबाह में मेरी

दिल-ओ-निगाह में हैरत के रंग भरता हूँ
ये काएनात है किस इश्तिबाह में मेरी

ये क्या तज़ब्ज़ुब-ए-बे-इंतिहा है आँखों में
किसी तरह वो खुले मुझ पे चाह में मेरी

शराब तेज़ है इक शाम है चराग़ भी है
और इंतिज़ार है हुस्न-ए-सिपाह में मेरी

मैं अपने ख़ाली दिनों में पलट के देखता हूँ
वो एक याद सलामत है राह में मेरी

फ़सुर्दगी दम-ए-आख़िर मज़ीद थी लेकिन
वो ख़्वाब तक तो रहा है पनाह में मेरी

ये ज़ख़्म मेरे ही नाख़ुन से रंग रंग हुए
किसी को दख़्ल नहीं बारगाह में मेरी