उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo bhi ho gae shamil mere nukta-chinon mein

वो भी हो गए शामिल मेरे नुक्ता-चीनों में

وہ بھی ہو گئے شامل میرے نکتہ چینوں میں

शायर: Zafar Aziz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो भी हो गए शामिल मेरे नुक्ता-चीनों में
मैं ने जिन को पाला था अपनी आस्तीनों में

आइने परखने का तज्रबा हमें भी है
एक उम्र गुज़री है अपनी मह-जबीनों में

बारहा मोहब्बत के बीज बो के देखा है
नफ़रतें ही उगती हैं आज-कल ज़मीनों में

क्या बचाते जाँ अपनी हर तरफ़ ही क़ातिल थे
और जो मुहाफ़िज़ थे मिल गए कमीनों में

सामना तो होने दो ख़ुद ही जान जाओगे
तुम को हम ने देखा है सिर्फ़ दूर-बीनों में

नज़रिया बदल जाए या नज़र बदल जाए
बाल आ ही जाते हैं दिल के आबगीनों में

अब कहाँ 'ज़फ़र' साहिब हुस्न में सलीक़ा है
इश्क़ भी नहीं मिलता अब कहीं क़रीनों में