उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uTho is shan se ki waqt ke dhaare badal Dalo

उठो इस शान से कि वक़्त के धारे बदल डालो

اٹھو اس شان سے کہ وقت کے دھارے بدل ڈالو

शायर: Ibraheem Khaleel5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उठो इस शान से कि वक़्त के धारे बदल डालो
निगाहें थक चुकीं जिन से वो नज़्ज़ारे बदल डालो

ज़माना तिश्ना-काम-ए-अम्न है तस्कीं का भूका है
चलो ज़ुल्म-ओ-तशद्दुद-ख़ेज़ गहवारे बदल डालो

तुम्हारे हाथ में आने को है फिर गर्दिश-ए-दौराँ
अज़ाएम अपने भी कुछ ऐ मिरे प्यारे बदल डालो

यहाँ तो सब को जीना है सभी को जीने देना है
तरीक़ा वो जो अपना ये भी हक़ मारे बदल डालो

'ख़लील' इक जान हो जाना ज़रूरी है ज़माने में
ख़लल-अंदाज़ शीराज़े के शह-पारे बदल डालो