उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ruKH pe apne naqab rahne de

रुख़ पे अपने नक़ाब रहने दे

رخ پہ اپنے نقاب رہنے دے

शायर: Ibraheem Khaleel5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रुख़ पे अपने नक़ाब रहने दे
दरमियाँ इक हिजाब रहने दे

सई-ए-पैहम की सिसकियों पे न जा
शौक़ में पेच-ओ-ताब रहने दे

दिल का आईना है जवाब तिरा
है भी तू ला-जवाब रहने दे

जुर्म मेरे कहाँ तिरी रहमत
ये हिसाब-ओ-किताब रहने दे

फिर कहीं खो के रह न जाए 'ख़लील'
इज़्न-ए-चंग-ओ-रबाब रहने दे