उर्दू शायरी · ग़ज़ल

us lab se suKHan-saz ishaare nahin utre

उस लब से सुख़न-साज़ इशारे नहीं उतरे

اس لب سے سخن ساز اشارے نہیں اترے

शायर: Gauhar Ansari6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस लब से सुख़न-साज़ इशारे नहीं उतरे
दरिया-ए-समा'अत में सितारे नहीं उतरे

चाहत का सिला माँगना आता नहीं हम को
मैदान में हम बल पे तुम्हारे नहीं उतरे

तारीकी-ए-क़िस्मत ने तक़ाज़ा तो किया था
दामन पे मगर आँख से तारे नहीं उतरे

था अहल-ए-सुख़न में भी तज़ाद-ए-लब-ओ-लहजा
कितने ही कसौटी पे करारे नहीं उतरे

गर्मी जो 'अता करते हैं सीने के लहू को
आँखों में तुम्हारी वो नज़ारे नहीं उतरे

दुनिया ने किसी की जो मदद की नहीं 'गौहर'
ऐसा ही नहीं उस के सहारे नहीं उतरे