उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na koi fikr rakhta hai na ehsasat rakhta hai

न कोई फ़िक्र रखता है न एहसासात रखता है

نہ کوئی فکر رکھتا ہے نہ احساسات رکھتا ہے

शायर: Gauhar Ansari5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न कोई फ़िक्र रखता है न एहसासात रखता है
हमेशा तल्ख़ लहजे में वो अपनी बात रखता है

अना झुकने नहीं देती किसी के सामने लेकिन
सर उस के सामने ख़म है जो सर पर हाथ रखता है

किसी के हाथ में छाले किसी के दिल में ग़म की लौ
हर इक मज़दूर अपने पास ये सौग़ात रखता है

तुम उस से छुप न पाओगे छुपा कर अपना चेहरा भी
वो दिल का हाल पढ़ लेने की ता'लीमात रखता है

'अता की है उसी ने 'इज़्ज़त-ओ-शोहरत मुझे 'गौहर'
करम उस का है जो बे-'ऐब अपनी ज़ात रखता है