उर्दू शायरी · ग़ज़ल

safar mein jab akeli koi laDki baiTh jati hai

सफ़र में जब अकेली कोई लड़की बैठ जाती है

سفر میں جب اکیلی کوئی لڑکی بیٹھ جاتی ہے

शायर: Gauhar Ansari6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सफ़र में जब अकेली कोई लड़की बैठ जाती है
तो उस के साथ फ़िक्रों की सहेली बैठ जाती है

ख़ुदा ने लाज रख ली है किसी की दस्त-कारी की
वो गुल नक़ली है लेकिन उस पे तितली बैठ जाती है

मैं उस के वास्ते इक तिब्बी नुस्ख़ा बन के आया हूँ
वो मेरा नाम लेता है तो हिचकी बैठ जाती है

नज़र में आप की हिजरत का मंज़र घूम जाता है
दहान-ए-ग़ार पर जब एक मकड़ी बैठ जाती है

ख़ुदा ईमान वालों को बचा लेता है तूफ़ाँ से
तभी तो नूह की कश्ती में बस्ती बैठ जाती है

हमारा तज्रबा 'गौहर' यही ए'लान करता है
अगर बुनियाद कच्ची हो हवेली बैठ जाती है