उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uski jaan nazr hui raat lahu ko mere

उस की जाँ नज़्र हुई रात लहू को मेरे

اس کی جاں نذر ہوئی رات لہو کو میرے

शायर: Osaama ameer6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस की जाँ नज़्र हुई रात लहू को मेरे
जिस ने समझा शरर-ईजादी-ए-ख़ू को मेरे

बाग़ में गुल का ठहरना बड़ा दुश्वार हुआ
उस ने जब देख लिया आइना-रू को मेरे

इक शनासा ही मिरा दहर-ए-ख़ुराफ़ात में है
जो अलग वज़' से भरता है सुबू को मेरे

मुनहसिर आप की ही तब'-ए-रवाँ पर है हुज़ूर
ख़ौफ़-ए-शमशीर नहीं ख़ुश्क गुलू को मेरे

सर-बसर तू है मिरा वाक़िफ़-ए-अहवाल-ओ-जुनूँ
नक़्श-ए-पा तक नहीं मिलते हैं किसू को मेरे

सतवत-ए-शान मिरी आब कहाँ देखती है
रंग ही रंग हैं दरकार वुज़ू को मेरे