उर्दू शायरी · ग़ज़ल

un ke huzur nazr-e-mayassar hi le chalen

उन के हुज़ूर नज़्र-ए-मयस्सर ही ले चलें

ان کے حضور نذر میسر ہی لے چلیں

शायर: Urooj Zaidi Badayuni6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उन के हुज़ूर नज़्र-ए-मयस्सर ही ले चलें
आँसू नहीं तो ख़ुश्क समुंदर ही ले चलें

इख़्लास चाहता है उन्हें अपना हम-सफ़र
वो ख़्वाह आस्तीन में ख़ंजर ही ले चलें

हम इज़्न-ए-अर्ज़-ए-हाल पे अब कश्मकश में हैं
दिल को ये ज़िद है शौक़ का दफ़्तर ही ले चलें

गंज-ए-क़फ़स में होगी न ये बज़्म-ए-रंग-ओ-बू
मंज़र जो सामने है वो मंज़र ही ले चलें

दामन में गुल नहीं तो बरा-ए-सुबूत-ए-सैर
सेहन-ए-चमन से ख़ार के नश्तर ही ले चलें

सरमाया-ए-'उरूज' हैं ताज़ा ग़ज़ल के फूल
बज़्म-ए-सुख़न में शाख़-ए-गुल-ए-तर ही ले चलें