उर्दू शायरी · ग़ज़ल

umr se sadiyon ka rishta nahin rakkha jata

'उम्र से सदियों का रिश्ता नहीं रक्खा जाता

عمر سے صدیوں کا رشتہ نہیں رکھا جاتا

शायर: Kalam Aazar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'उम्र से सदियों का रिश्ता नहीं रक्खा जाता
नफ़्स पर इतना भरोसा नहीं रक्खा जाता

आमद-ओ-रफ़्त ज़रूरी है किसी चेहरे की
बंद सब पर ये दरीचा नहीं रक्खा जाता

आस्तीं में कोई बुत सर किसी संग-ए-दर पर
हम से माथे पे ये धब्बा नहीं रक्खा जाता

तुझ में कुछ ख़ूबी अगर है तो उसे सामने ला
ज़ो'म का नाम करिश्मा नहीं रक्खा जाता

'आम तहरीरों से हट कर है सहीफ़ों का मिज़ाज
काँच के टुकड़ों में हीरा नहीं रक्खा जाता

दिल भी अब नित-नई आफ़ात सहेगा कब तक
हम से कूज़े में ये दरिया नहीं रक्खा जाता

संग को आप भी कहने लगे शीशा 'आज़र'
इतना कमज़ोर 'अक़ीदा नहीं रक्खा जाता