उर्दू शायरी · ग़ज़ल

khod kar sadiyon ki tah se mujhe ghar le aata

खोद कर सदियों की तह से मुझे घर ले आता

کھود کر صدیوں کی تہہ سے مجھے گھر لے آتا

शायर: Kalam Aazar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

खोद कर सदियों की तह से मुझे घर ले आता
आने वाला कोई लम्हा मिरे पर ले आता

किसी दरिया से सदफ़ ढूँडता इंसाँ था तो
किसी पत्थर के 'इलाक़े से गुहर ले आता

क़द की लम्बाई से अफ़ज़ल नहीं होता कोई
हाँ अगर तू मिरी हम-रुत्बा नज़र ले आता

हौसला खो दिया सच कहने का तुम ने वर्ना
तल्ख़ जुमला भी मोहब्बत का असर ले आता

वुस'अतें पल में सिमट आतीं ज़माने भर की
लफ़्ज़ उड़ने को जो तख़्ईल के पर ले आता

साँस लेने को यहाँ ज़ह्र भी पीते हैं लोग
तू भी 'आज़र' कोई जीने का हुनर ले आता