उर्दू शायरी · ग़ज़ल

umangen dil mein hon sahra bhi aalishan lagta hai

उमंगें दिल में हों सहरा भी आलीशान लगता है

امنگیں دل میں ہوں صحرا بھی عالیشان لگتا ہے

शायर: Deepak Danish5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उमंगें दिल में हों सहरा भी आलीशान लगता है
बुझे दिल को सजी महफ़िल का दर वीरान लगता है

हो कोई हम-सफ़र ऐसा जो दिल को हम-नफ़स गुज़रे
इसी हसरत पे हर लम्हा मुझे क़ुर्बान लगता है

यक़ीनन है ख़बर में आज रब की बे-ज़बाँ दुनिया
मगर इंसान कल की फ़िक्र का सामान लगता है

फ़ज़ा में यूँ तकल्लुफ़ है हवा में यूँ है बेदारी
कि दिल ऐवान-ए-हस्ती में फ़क़त मेहमान लगता है

खुली खिड़की से 'दानिश' अम्न के अख़बार रोज़ाना
ये मंज़र अब किसी फ़िरदौस का उन्वान लगता है