उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har zarra chaman-zar ki zinat ka sabab hai

हर ज़र्रा चमन-ज़ार की ज़ीनत का सबब है

ہر ذرہ چمن زار کی زینت کا سبب ہے

शायर: Deepak Danish6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर ज़र्रा चमन-ज़ार की ज़ीनत का सबब है
महफ़िल में चमन-ज़ार की हर शय का अदब है

इक उम्र ब-दस्तूर गुज़र जाए तो बेहतर
गो दिल में ब-दस्तूर ठहरने की तलब है

कुछ यूँ है मुक़द्दर की हक़ीक़त कि जहाँ में
ज़ुल्मत है कहीं दिन में कहीं नूर की शब है

हर चीज़ में तामील ख़िरद की न हो लेकिन
हर चीज़ पे उस चीज़ का दावा तो अजब है

रखने को तबद्दुल का भरम मुड़ के जो देखा
वैसी ही थी दुनिया मिरी जैसी कि वो अब है

दुनिया न हो फ़िरदौस पर इतना तो है 'दानिश'
जैसी भी है दुनिया मिरी हस्ती का सबब है