उर्दू शायरी · ग़ज़ल

pardon se ghar ke raaz chhupaega kya koi

पर्दों से घर के राज़ छुपाएगा क्या कोई

پردوں سے گھر کے راز چھپائے گا کیا کوئی

शायर: Deepak Danish6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पर्दों से घर के राज़ छुपाएगा क्या कोई
फूलों से घर का रूप खिलाएगा क्या कोई

मुश्किल से घर की बंद हवा पर है इख़्तियार
बाहर हवा को राह दिखाएगा क्या कोई

मेहनत से थक के चूर गुनाहों की भीड़ को
अच्छे-बुरे का फ़र्क़ सिखाएगा क्या कोई

बाज़ार अब है ज़ीस्त की रूह-ए-रवाँ मगर
आब-ओ-हवा के दाम लगाएगा क्या कोई

हर क़िस्म की शराब मयस्सर हुई तो क्या
पानी से बढ़ के प्यास बुझाएगा क्या कोई

आगे निकल चुकी है हया से नज़र की बात
'दानिश' किसी से आँख मिलाएगा क्या कोई