उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tu ne kya qindil jala di shahzadi

तू ने क्या क़िंदील जला दी शहज़ादी

تو نے کیا قندیل جلا دی شہزادی

शायर: Tahzeeb Hafi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तू ने क्या क़िंदील जला दी शहज़ादी
सुर्ख़ हुई जाती है वादी शहज़ादी

शीश-महल को साफ़ किया तिरे कहने पर
आईनों से गर्द हटा दी शहज़ादी

अब तो ख़्वाब-कदे से बाहर पाँव रख
लौट गए हैं सब फ़रियादी शहज़ादी

तेरे ही कहने पर एक सिपाही ने
अपने घर को आग लगा दी शहज़ादी

मैं तेरे दुश्मन लश्कर का शहज़ादा
कैसे मुमकिन है ये शादी शहज़ादी