उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum se na mil ke KHush hain wo dawa kidhar gaya

तुम से न मिल के ख़ुश हैं वो दावा किधर गया

تم سے نہ مل کے خوش ہیں وہ دعویٰ کدھر گیا

शायर: Kaif Bhopali4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम से न मिल के ख़ुश हैं वो दावा किधर गया
दो रोज़ में गुलाब सा चेहरा उतर गया

जान-ए-बहार तुम ने वो काँटे चुभोए हैं
मैं हर गुल-ए-शगुफ़्ता को छूने से डर गया

इस दिल के टूटने का मुझे कोई ग़म नहीं
अच्छा हुआ कि पाप कटा दर्द-ए-सर गया

मैं भी समझ रहा हूँ कि तुम तुम नहीं रहे
तुम भी ये सोच लो कि मिरा 'कैफ़' मर गया